मनासा में महिलाओं ने गाय के गोबर से गोवर्धन बनाकर की पूजा-अर्चना, कर भगवान को भोग लगाए…

पियुश राठौड़ बनी

बनी दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोक जीवन में बहुत महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दिखाई देता है। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोक कथा है। गोवर्धन पूजा में गोवर्धन अर्थात गायों की पूजा की जाती है। गोवर्धन को अन्नकूट, पड़वा या प्रतिपदा के नाम से भी जाना जाता है। गोवर्धन के दिन घर के आंगन, छत या फिर बाहर गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है। लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुवा। दरअसल साल का दूसरा व आखिरी सूर्यग्रहण दिवाली के अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को लगने के कारण दिवाली और गोवर्धन पूजा में एक दिन का अंतर आया है। इस साल गोवर्धन पूजा 26 अक्टूबर 2022, बुधवार को मनाया गया। इस दिन ही भाईदूज का त्योहार मनाया गगा। गोवर्धन पूजा को देश के कुछ हिस्सों में अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन दिन भगवान श्री कृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा- अर्चना की जाती है। गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्री कृष्ण को 56 या 108 तरह के पकवानों का भोग भी लगाया जाता है। ग्रामीण सहित क्षेत्र के प्रत्येक ग्राम में महिलाओ ने अपने अपने घरों व मन्दिर के आगे सामूहिक रूप से भगवान गोवर्धन बनाकर इनकी पूजा अर्चना की। अन्नकूट या गोवर्धन पूजा भगवान कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारम्भ हुई है. इसमें हिन्दू धर्मावलंबी घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन नाथ जी की अल्पना बनाकर उनका पूजन करते है. उसके बाद गिरिराज भगवान (पर्वत) को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। इस दिन मंदिरों में अन्नकूट किया जाता है।
संबंधित

 

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!